विरासत में मिली जर्जर व्यवस्था, हमने शासन प्रशासन को बनाया जवाबदेह संवेदनशील : योगी

लखनऊ, भाषा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज कहा कि उन्हें विरासत में जर्जर व्यवस्था मिली लेकिन उनकी सरकार ने शासन प्रशासन को जवाबदेह और संवेदनशील बनाया है। योगी ने यहां एक कार्यक््रम में कहा विरासत में एक जर्जर व्यवस्था मिली है। बदहाल कानून-व्यवस्था, बेलगाम नौकरशाही, कार्यालयों में अनुपस्थित कर्मचारी, धूल खाती फाइलें, कार्यालयों में दलालों का जमावड़ा यह उत्नार प्रदेश की पहचान बन चुकी थी। अपनी सरकार के विगत 100 दिनों के काम-काज पर प्रकाश डालते हुए योगी ने कहा, अब शासन-प्रशासन को संवेदनशील और जवाबदेह बनाया गया है। जिलाधिकारियोांवरिष्ठ पुलिस अधीक्षकोांपुलिस अधीक्षकों को समय से कार्यालय में अपनी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सत्नाा में आने के बाद वर्तमान सरकार ने आम जनता के कल्याण और उत्थान के लिए तुरन्त प्रभावी कार्यवाही शुरू की। यह सरकार सबका साथ सबका विकास के सिद्धान्त पर कार्य कर रही है। राज्य सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के सभी वर्गो के लिए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार की उपलब्धियों के आधार पर प्रदेश की जनता ने 2017 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत देते हुए उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का जनादेश दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 14-15 वर्षों में यहां सत्ता में रही अन्य सरकारों के भ्रष्टाचार और परिवारवाद के कारण जनता त्रस्त हो चुकी थी। कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब थी और प्रदेश विकास की दौड़ में पूरी तरह से पिछड़ चुका था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के विकास और उत्थान के लिए कटिबद्ध है। विगत कई वर्षो से दैविक आपदाओं के चलते किसानों की स्थिति बदहाल हो गई थी। इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने लगभग 86 लाख लघु एवं सीमांत किसानों के एक लाख रुपये तक के फसली ऋण माफ करने का निर्णय लिया है, जिस पर लगभग 36 हजार करोड़ का वित्तीय भार आएगा। राज्य सरकार इस चुनौती का सामना वित्तीय अनुशासन तथा अनावश्यक खर्चो में कटौती करके करेगी। इस ऋण माफी के कारण न तो जनता पर कोई बोझ डाला जाएगा और न ही प्रदेश के विकास की रफ्तार धीमी पड़ेगी।
योगी ने कहा कि किसानों के आथर्कि विकास पर ध्यान केन्द्रित करते हुए और उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने किसानों की फसल खरीद का निर्णय लिया, जिसके तहत प्रदेश में पांच हजार से अधिक गेहूं क््रय केन्द्र स्थापित किए गए। इन केन्द्रों पर किसानों से सीधे गेहूं खरीद की जा रही है। अब तक 37 लाख टन गेहूं खरीद की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीद के लक्ष्य को 40 लाख टन से बढ़ाकर 80 लाख टन किया जाएगा। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी प्रयास करेगी।

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